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बंगलुरू से सीख सकते हैं वेस्ट मैनेजमेंट

जब हम एक साथ 104 उपग्रह अंतरिक्ष में प्रक्षेपित करने के रिकॉर्ड पर गर्व कर रहे हैं, हमें इस बात पर शर्मिंदा होना चाहिए कि आज भी हमारे शहर अपने कूड़े-कचरे को संभाल नहीं पा रहे. भारत सरकार के शहरी विकास मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, हमारे शहरों से रोजाना 1 लाख 57 हजार 479 टन कचरा निकलता है, जिसमें से महज 21.51 फीसदी कचरा ही शोधित किया जाता है. बाकि तकरीबन 1.23 लाख टन कचरा शहरों के बाहर बने लैंडफिल साइट्स में डाल दिया जाता है.

तेजी से बढ़ रहे हमारे शहर कुछ ही वर्षों में एक लैंडफिल साइट को पाट देते हैं और अगले कुछ वर्षों में वहां कूड़े का पहाड़ खड़ा हो जाता है. इसके बाद एक नए लैंडफिल साइट की तलाश शुरू हो जाती है. ज्यादातर महानगरों के बाहर आज कूड़े के जो पहाड़ नजर आते हैं, वो हमारे इस कचरे के मिसमैनेजमेंट का नतीजा हैं.

बेंगलुरु देश के उन चुनिंदा शहरों में से एक है जहां वेस्ट सेग्रीगेशन (कूड़े को बाहर निकालने से पहले उसे उसके प्रकार गीला, सूखा और सेनेटरी के आधार पर अलग-अलग करना) अनिवार्य कर दिया गया है. गीले कचरे को कंपोस्ट कर खाद बनाया जा सकता है, सेनेटरी कूड़े को इंन्सीनरेटर से जला दिया जाता है. ऐसे में सिर्फ सूखा कूड़ा बच जाता है, जिसमें से कई चीजें दोबारा इस्तेमाल कर ली जाती हैं और अंत में बचे हिस्से को ही लैंडफिल साइट पर भेजा जाता है. ऐसे में कूड़ा न टॉक्सिक होता है और न इसे ज्यादा जगह की जरूरत होती है.

बृहत बेंगलुरू महानगर पालिके (बीबीएमपी) ने दूसरा बड़ा निर्णय जो लिया है, वह है वेस्ट मैनेजमेंट के विकेंद्रीकरण करने का. बीबीएमपी ने प्रति दिन 10 किलोग्राम से अधिक कूड़ा पैदा करने वाले कमर्शियल स्पॉट्स जैसे मॉल, रेस्तरां, होटल और 50 यूनिट से अधिक वाले रेसिडेंशियल अपार्टमेंट के लिए उनके कूड़े का मैनेजमेंट खुद करने को अनिवार्य कर दिया है. इसमें भी गीले कूड़े को परिसर में ही कम्पोस्ट करने के लिए प्लांट लगाना भी शामिल है. हालांकि, उनकी मदद के लिए कई वेंडर्स को इम्पैनल भी किया गया है, जिन्हें शुल्क चुकाकर सेवाएं ली जा सकती हैं.

ऐसा नहीं कहा जा सकता कि बेंगलुरु ने शहरों से निकलने वाले कचरे का पूरा समाधान कर लिया है. अब भी कई हाउसिंग सोसायटीज अपना कचरा बिना सेगरिगेट किए बीबीएमपी ठेकेदारों को दे देती हैं, तो कई सोसायटीज कम्पोस्टिंग यूनिट लगाने के बावजूद उसका इस्तेमाल नहीं करती हैं. इसके अलग-अलग कारण हैं. फिर भी वेस्ट मैनेजमेंट में भारत की यह आईटी राजधानी मुंबई या दिल्ली जैसे मेगा शहरों से भी काफी आगे है.

जयपुर, इंदौर और भोपाल जैसे तेजी से बढ़ते शहर कूड़े के निपटारे के लिए बेंगलुरु के अनुभवों से अपना वेस्ट मैनेजमेंट बेहतर बना सकते हैं. अगर ये शहर अभी नहीं सीखे तो कल को बेंगलुरु की तरह उनके नागरिक भी सड़कों पर उतर आएंगे.