| 23-09-2026 |
2005 में 1995 के मास्टर प्लान की अवधि समाप्त हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद मास्टर प्लान का ड्राफ्ट तैयार होगा और उस पर दावे और आपत्तियों के लिए 30 दिन का समय दिया जाएगा । इस पर सुनवाई होगी और उसके बाद 90 दिन का समय निराकरण के लिए दिया जाएगा।

भोपाल का नया मास्टर प्लान का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है । 1995 के बाद आज तक भोपाल का मास्टर प्लान रिवाइज नहीं हुआ है यह जानबूझकर किया जा रहा है या अनजाने में यह सभी जानते हैं। भोपाल के बड़े तालाब के आसपास कैचमेंट एरिया को कर करके शादी हॉल , हॉस्पिटल और अन्य संस्थाएं रिसोर्ट , अधिकारियों के बंगले तैयार कर लिए गए हैं । एनजीटी लगातार दवाब बना रहा है कि उस इलाके को जल्द से जल्द खाली कराकर मुनारे सही जगह पर लगाई । जाए फुल टैंक लेवल देखा जाए । वहीं साथ में शहर के रिहाईशी क्षेत्र में बड़ी-बड़ी शॉपिंग मॉल संचालित हो रही थी। अन्य गतिविधियां संचालित होने से भोपाल के रिहाईशी इलाकों के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई थी। जहां से उनको बंद करने का निर्देश प्राप्त हो चुका है । लेकिन नगर निगम अभी भी उसमें टाल मटोल करता जा रहा है । इन सबको देखते हुए ही सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में आखिर यह कहा गया कि अब सरकार ड्राफ्ट जारी कर लोगों के दावे और आपत्तियां व सुझाव लेने की कार्रवाई आरंभ करें। ड्राफ्ट जारी करने से पहले उसे सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दिखाना पड़ेगा उसके बाद ही मास्टर प्लान प्रिंट होगा। 2005 में 1995 के मास्टर प्लान की अवधि समाप्त हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद मास्टर प्लान का ड्राफ्ट तैयार होगा और उस पर दावे और आपत्तियों के लिए 30 दिन का समय दिया जाएगा । इस पर सुनवाई होगी और उसके बाद 90 दिन का समय निराकरण के लिए दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि सीलिंग की कार्रवाई की जाए जो रिहाईशी क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं उन पर तुरंत सील लगाकर बंद किया जाए और बने हुए स्ट्रक्चर को तोड़ा जाए । परंतु उसके ऊपर नगर निगम के अधिकारी राजनीतिक दबाव और स्थानीय व्यवसायी के दबाव में टाल मटोल कर रहे थे। अब सरकार ने बोल दिया है की सीलिंग की एक्टिविटी में सरकार का कोई भी हस्तक्षेप नहीं होगा। सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिया है कि अब नगर निगम की कार्रवाई लगातार चलेंगी और सरकार उसमें किसी तरीके का हस्तक्षेप नहीं करेगा