| 09-08-2026 |
गलत बातों को खामोशी से सुनना हामी भर लेना बहुत है फा़यदे इसमें मगर अच्छा नहीं लगता

जिधर जाते हैं सब जाना उधर अच्छा नहीं लगता मुझे पामाल रास्तों का सफ़र अच्छा नहीं लगता
गलत बातों को खामोशी से सुनना हामी भर लेना बहुत है फा़यदे इसमें मगर अच्छा नहीं लगता
मुझे दुश्मन से भी खु़द्दारी की उम्मीद रहती है किसी का भी हो सर कदमों में सर अच्छा नहीं लगता
बुलंदी पर उन्हें मिट्टी की खुशबू तक नहीं आती ये वो शाखें हैं जिन को अब शजर अच्छा नहीं लगता
क्यूं बाकी़ रहे आतिश - जनों ये भी जला डालो कि सब बे-घर हों और मेरा हो घर अच्छा नहीं लगता
जावेद अख्तर