| 12-08-2026 |
यहां जनता , युवा अपनी मांगों के लिए सड़कों पर उतरती है जिसकी बातें सुनने के लिए इन जनप्रतिनिधियों के पास समय नहीं है। टाल मटोली करके किसी भी तरीके से बातों को टाला जा रहा है।

जनप्रतिनिधियों की कमाई जनता की पिटाई ,युवाओं की पिटाई, क्या यही आज का दौर है। यही विकास की परिभाषा है ? जिन्हें जनता ने चुनकर जनप्रतिनिधि के रूप में संसद में भेजा है, विधानसभाओं में भेजा है, वहां पर जब सत्र चलते हैं तो उन्हें उनका भत्ता मिलता है । उनके वेतन मिलते हैं , और उनकी सुविधाओं का ध्यान रखा जाता है।यहां जनता , युवा अपनी मांगों के लिए सड़कों पर उतरती है जिसकी बातें सुनने के लिए इन जनप्रतिनिधियों के पास समय नहीं है। टाल मटोली करके किसी भी तरीके से बातों को टाला जा रहा है। क्या यह देश के विकास के लिए उचित है ? युवा अपनी मांगों के लिए सड़कों पर बैठे हुए हैं जिनके ऊपर वार किया जा रहे हैं । वह चाहे लाठी के हो , बंदूक के हो , पैलेट के हो। जालियां उन्हें रोकने के लिए ऐसी लगाई जा रही हैं जैसे जानवरों को रोकने के लिए बड़े बनाए जाते हैं । क्या यह युवाओं का सम्मान हो रहा है? युवाओं ने कौन सी मांग गलत की है ? पेपर लीक के ऊपर जो कार्रवाई होनी चाहिए वह होनी चाहिए । परंतु लगता है कि सारे राजनीतिक दल सिर्फ दिखाने के लिए एक दूसरे के ऊपर आरोप प्रत्यारोप लग रहे हैं। लेकिन किसी का भी मन उचित कार्रवाई के लिए नहीं है । क्योंकि इन पेपर लीक के पीछे कहीं ना कहीं राजनीतिक दल से जुड़े हुए लोग ही शामिल होते हैं। तो क्यों जनता को गुमराह कर रहे हैं ? क्यों उनकी पिटाई लगवा रहे हैं , सदन में आकर चर्चा करें , सच्चाई से बात करें। उस पर की गई कार्रवाई जनता को दिखाई दे , अन्यथा युवा अब समझदार हो चुका है । ईवीएम मशीन और बाकी चीज अपनी जगह रहेगी। सत्ता परिवर्तन और नए सांसदों का परिवर्तन जरूर अब दिखाई देगा। बिहार की राजनीति ने दिखा दिया है कि एक बड़े राजनीतिक दल के प्रत्याशी को किस तरीके से हराया गया और एक नए पढ़े लिखे व्यक्ति को वहां पर विधानसभा की सीट दी गई । यही अब देश में होना चाहिए जहां पढ़े-लिखे , जनप्रतिनिधि हम चुने ।