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21 Jul, 2026

नैतिकता और चरित्र

हिंदुस्तान के सुरक्षा बलों ने जिस तरह संसद के सामने अपनी गन युवाओं की ओर तानी वह बेहद शर्मनाक है, क्या वह कोई आतंकवादी के साथ मुठभेड़ करने की प्लानिंग थी ? गन तभी तनी जाती है जब उसे निर्देश हो के देखते ही उसे पर गोली चालन कर दिया जाए अन्यथा गन का मुंह कभी आम जनता की ओर नहीं किया जाता,

जिस्म क्या है रूह तक सब कुछ खुलासा देखिए ,आप भी इस भीड़ में घुस कर तमाशा देखिए ,जो बदल सकती है दुनिया के मौसम का मिज़ाज ,उस युवा पीढ़ी के चेहरे की हताशा देखिए ,

                                                अदम

      जंतर मंतर पर आज जिस तरह युवाओं के ऊपर लाठीचार्ज , आंसू गैस के गोले छोड़े गए और बैरिकेडिंग लगाकर मारपीट की गई, लाठी चार्ज किया गया है वह अत्यंत निंदनीय है। उन युवाओं की मांगे क्या थी ? क्या इस पर संवेदनहीन सरकार को एक बार नहीं विचार करना चाहिए या उनके यहां कोई विचार करने वाला आदमी ही नहीं है। हिंदुस्तान के सुरक्षा बलों ने जिस तरह संसद के सामने अपनी गन युवाओं की ओर तानी वह बेहद शर्मनाक है, क्या वह कोई आतंकवादी के साथ मुठभेड़ करने की प्लानिंग थी ? गन तभी तनी जाती है जब उसे निर्देश हो के देखते ही उसे पर गोली चालन कर दिया जाए अन्यथा गन का मुंह कभी आम जनता की ओर नहीं किया जाता, यह सामान्य जानकारी है । परंतु युवाओं की ओर गन दिखाकर तैयारी रखना यह अपने आप में बताता है कि सरकार किसी भी तरीके से अपनी गलती मानने को तैयार नहीं है । युवाओं की मांग क्या थी ? नीट के आरोपी के ऊपर कारवाई हो, नैतिकता के आधार पर देश के शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हो , इसमें क्या गलत है । यहां यह भी गौर करने काबिल है कि इसी केंद्र सरकार के एक मंत्री जो ऑपरेशन सिंदूर में 6 लोगों के शहीद होने की बात को भी संसद में छुपा चुके थे, और अब साबित की है । वह कहते हैं कि हमारे यहां इस्तीफा देने की कोई परंपरा नहीं है । इससे समझ में आता है कि नैतिकता और चरित्र किसी भी स्तर पर कहां पर है, आज के दौर में राजनीतिक में। सोनम वांगचुक जैसे इंसान जिन्होंने भारतीय सेना के लिए क्या-क्या नए इन्नोवेशंस किए हैं , युवाओं के लिए क्या नई खोज की हैं , और जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और देश की सरकार ने भी उन्हें पुरस्कृत किया है। बाद में उनके साथ बदतमीजी देते हुए एन एस ए भी लगा दिया और 6 माह तक जेल में भी रखा। जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट के जाने के बाद हटा लिया गया क्या यह नैतिकता है सरकार की? बहरहाल पहली बार इस प्रदर्शन में शामिल हुए बच्चे युवा और आम लोग जो अपने बच्चों के हितों की लड़ाई लड़ रहे थे उन्हें यह समझ में आ गया कि यह सरकार किसी भी तरीके से सच की बात सुनने के लिए तैयार नहीं है । भविष्य के लिए आज के यह युवा वोटर जो कि हिंदुस्तान में लगभग 35% हैं वह अपने मतदान के समय मत का उपयोग किस तरह करेंगे यह भविष्य बताएगा । लेकिन आज के घटनाक्रम ने युवाओं के मन में इस सरकार के प्रति एक अच्छा माहौल तैयार नहीं किया है।