07-03-2026 • समय पर हो सिंहस्थ के सभी कार्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव    • सिक्किम में संभावित मेगालिथिक दफन स्थल की पहचान    • अमृत 2 में मध्य प्रदेश की रफ्तार धीमी    • एम्स भोपाल में जटिल माइक्रोसर्जरी से लकवाग्रस्त हाथ में लौटी हरकत    • सिक्किम पुलिस को राष्ट्रपति पुलिस कलर सम्मान    • शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को दूसरा नोटिस    • शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को दूसरा नोटिस    • स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अन्न-जल त्याग कर अनशन पर    • स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अन्न-जल त्याग कर अनशन पर    • 'धुरंधर' ने बना डाला ये तगड़ा रिकॉर्ड    


16 Jan, 2026

मध्य प्रदेश में नगर निगम के सिस्टम पर सवाल

एस टी पी में निर्माण कार्य की लागत बहुत ज्यादा है, बिजली का खर्च बहुत ज्यादा है इसी कारण नगर निगम उसे खर्च को वहन ना कर पाने के कारण सीधा अनट्रीटेड वाटर जिसमें फ़ीकल कॉलीफॉर्म की अत्यधिक मात्रा होती है उसे नदी में कहीं ना कहीं छुपा कर बहा देते हैं।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश में पेयजल की व्यवस्था पर और नगर निगम के सिस्टम पर सवाल खड़े किए हैं। एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच ने राज्य सरकार और समस्त नगर निगम को फटकार लगाई है, और जनता के सेहत से खिलवाड़ करने की बात कही है जो जन स्वास्थ्य और संविधान के अनुच्छेद 21 का सीधा उल्लंघन है जनता को स्वच्छ पेयजल न दे पाना। इंदौर का भागीरथपुरा तो मात्र एक उदाहरण था जहां इतने सारे लोगों ने अपनी जान गंवाई मध्य प्रदेश में यह समस्या भोपाल ,उज्जैन, ग्वालियर, खरगोन और हरदा जैसी जगहों पर पाई गई है । इसके अलावा कोई भी शहर शायद ऐसा होगा जिसमें इस तरीके की समस्या नहीं होगी। हालांकि ऊपर वाले की मेहरबानी से कोई बड़ा हादसा सामने नहीं आया। एनजीटी ने फटकार लगाते हुए कहा है कि लोगों को शुद्ध पेय जल दिलाना सरकार की जवाबदारी है ,मध्य प्रदेश में एस टी पी के नाम पर बड़ा गोरखधंधा किया जा रहा हैं । किसी भी शहर में एस टी पी सही ढंग से काम नहीं कर रहे हैं और सीवर का सीधा पानी नदियों में और पेयजल स्रोतों में जाकर मिल रहा है इसके अलावा लंबे समय से यह गंदा पानी एक जगह बैठ जाने से बोर में भी इसी तरीके के गंदे पानी की समस्याएं आ रही हैं जो जीवन के लिए हानिकारक है । पेयजल स्रोत के पैसे सरकार न जाने कहां खर्च कर रही है प्रदूषण नियंत्रण मंडल और केंद्रीय प्रदूषण मंडल के आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ भारत ही नहीं मध्य प्रदेश में भी एस टी पी के द्वारा ट्रीटमेंट का काम 30 से 40 परसेंट किया जा रहा है बाकी सीवर का सीधा पानी पेयजल स्रोत और नदियों में जाकर मिल रहा है।जबलपुर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने सीवर से अनट्रीटेड वाटर जो सीधे हिरन नदी और नर्मदा नदी में जा रहा है उसके लिए नगर निगम को चेतावनी दी है और प्रकरण को दर्ज किया है , जिसकी सुनवाई अभी इस माह के अंत में होनी है सरकारों की लापरवाही यह है कि वह एस टी पी के अलावा किसी वॉटर ट्रीटमेंट की तकनीक को मानता नहीं देना चाहते क्योंकि शायद उसमें भ्रष्टाचार की जगह कम है । एस टी पी में निर्माण कार्य की लागत बहुत ज्यादा है, बिजली का खर्च बहुत ज्यादा है इसी कारण नगर निगम उसे खर्च को वहन ना कर पाने के कारण सीधा अनट्रीटेड वाटर जिसमें फ़ीकल कॉलीफॉर्म की अत्यधिक मात्रा होती है उसे नदी में कहीं ना कहीं छुपा कर बहा देते हैं।भोपाल में ही बड़े तालाब में जो नाले सीधे जाकर सीवर का पानी गिर रहे हैं सरकार अभी तक मात्र इसके ऊपर उपाय खोज रही है और न्यायालय को गुमराह कर रही है जबकि नई तकनीक है पुरानी एसपी की तकनीक से ज्यादा बेहतर और कम लागत की आ चुकी है जिसके लिए अधिकारियों द्वारा सारी तकनीक की जानकारी होते हुए भी उसका उपयोग नहीं किया जा रहा एनजीटी द्वारा भोपाल नगर निगम को बड़े तालाब और शाहपुरा तालाब में नैनो बबल तकनीक के उपयोग की जानकारी लेने के लिए निर्देशित किया गया है परंतु अभी तक इस पर कोई पहल नहीं की गई है।