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29 Aug, 2026

केदारनाथ से नेपाल तक

नेपाल इस समय अर्थव्यवस्था की मामले में बहुत पीछे हो गया है। प्राथमिकता अभी लोगों को बचाने की और आम जिंदगी को पटरी पर लाने की है । आज एक छोटे से देश के लिए सभी लोगों को सामने आना चाहिए और हाथ बटाना चाहिए।

यह तय है कि इंसान हिमालय के प्रति गंभीर नहीं है और प्रकृति के साथ लगातार खिलवाड़ करता जा रहा है। हिमालय अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है इसका इकोसिस्टम बहुत ही नाजुक है। कभी भी इसके साथ छोटी सी भी छेड़छाड़ बहुत भारी दुष्परिणामों के रूप में सामने आती है । नेपाल में आई इस आपदा ने भीषण तबाही मचाई है भारी जन धन की हानि हुई है ।

नेपाल इस समय अर्थव्यवस्था की मामले में बहुत पीछे हो गया है। प्राथमिकता अभी लोगों को बचाने की और आम जिंदगी को पटरी पर लाने की है । आज एक छोटे से देश के लिए सभी लोगों को सामने आना चाहिए और हाथ बटाना चाहिए। विकास के नाम पर पहाड़ों पर पर्यटक स्थल जो धार्मिक थे, जहां बहुत ही सीमित लोग जाया करते थे , जिनकी धर्म में आस्था हो वे मेहनत करके जाया करते थे। आज उन्हें पर्यटन के नाम पर सुविधाजनक बनाकर ,उनके लिए जिस तरीके की सुविधाओं के लिए पहाड़ों में टनल बनाई जा रही हैं, पहाड़ों में हेलीपैड बनाए जा रहे हैं, पहाड़ों में हवाई पट्टियां बनाई जा रही हैं । इससे पर्यावरण का संतुलन बिगड़ रहा है और इन सब के लिए वहां पर स्वाभाविक है कि पेड़ों को भी काटा जाता है ।

यह सारी चीज मिलकर जब एक ऐसी स्थिति तैयार करती हैं तब आपके पास आपदा केदारनाथ जैसी या नेपाल जैसी आती है । इस ओर कभी ध्यान नहीं दिया जाता कि ऊपर के पहाड़ों पर भी लगातार कुछ निगाह रखी जाए । सरकारें इस चीज पर ध्यान नहीं देती हैं ,यदि ध्यान दिया गया होता तो इतनी बड़ी आपदा नहीं आती।