07-03-2026 • समय पर हो सिंहस्थ के सभी कार्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव    • सिक्किम में संभावित मेगालिथिक दफन स्थल की पहचान    • अमृत 2 में मध्य प्रदेश की रफ्तार धीमी    • एम्स भोपाल में जटिल माइक्रोसर्जरी से लकवाग्रस्त हाथ में लौटी हरकत    • सिक्किम पुलिस को राष्ट्रपति पुलिस कलर सम्मान    • शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को दूसरा नोटिस    • शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को दूसरा नोटिस    • स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अन्न-जल त्याग कर अनशन पर    • स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अन्न-जल त्याग कर अनशन पर    • 'धुरंधर' ने बना डाला ये तगड़ा रिकॉर्ड    


11 Oct, 2025

सरकारी पागल भिखारी पर नियंत्रण कब

मतलब यह कि पैसे देकर यदि पोस्टिंग ली जाएगी जैसा विपक्ष का आरोप है तो क्या इस तरीके से आम जनता से वसूली करने के लिए इनको खुली छूट दी जाएगी । माननीय मुख्यमंत्री महोदय को स्वयं नॉलेज में लेकर इस तरीके की चीजों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगना चाहिए और कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि लोगों में एक सनद बने।

भोपाल में जिस तरीके वर्दी दागदार हुई है वह अफसोस जनक है, युवाओं के साथ मारपीट करके और कथित ₹10000 की मांग करके और जान ले लेना यह कोई पागल भिखारी ही कर सकता है। इन्हें सस्पेंड के बजाय सीधे बर्खास्त करना चाहिए, इसमें जांच की कौन सी आवश्यकता है, जब आपके सामने दिखाई दे रहा है क्या वर्दी का यही खौफ रह गया है।

मध्य प्रदेश में ही सिवनी में एसडीओपी की शह पर हवाला के 3 करोड़ रुपए के बंदर बांट हो गई । मतलब यह कि पैसे देकर यदि पोस्टिंग ली जाएगी जैसा विपक्ष का आरोप है तो क्या इस तरीके से आम जनता से वसूली करने के लिए इनको खुली छूट दी जाएगी । माननीय मुख्यमंत्री महोदय को स्वयं नॉलेज में लेकर इस तरीके की चीजों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगना चाहिए और कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि लोगों में एक सनद बने। खंडवा की बीड चौकी पर 1 साल से ऊपर एक एफ आई आर के लिए आवेदन दिया हुआ है , जिसकी शिकायत बार-बार मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में , डी जी को , प्रमुख सचिव गृह को, आईजी इंदौर ,एस पी को सब जगह पत्र देने के बाद एक सब इंस्पेक्टर इतना पावरफुल है कि वह आरोपी को बचाने के लिए पूर्ण तैयार है। कोई अधिकारी वहां सुनवाई करने को तैयार नहीं है । लगभग 15 महीने हो जाने के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं हुई , क्या यह भोपाल और मध्य प्रदेश के लिए शान की बात है, गौरव की बात है?

रेत माफिया पर कार्रवाई न होने के कारण भिंड में जिस तरीके से कलेक्टर और विधायक में तू तू में में हुई , एक दूसरों पर घूसे और आंखें दिखाई गई, क्या वह मध्य प्रदेश की कानून व्यवस्था को सही दर्शाता है ? 23 बच्चों के मर जाने के बाद भी अमानवीय रवैया अपनाया गया। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ने घटना के दूसरे दिन ही क्लीन चिट दे दिया कि कफ सिरप मौत का कारण नहीं है बिना जांच के इस तरीके की चीज देखकर क्या किसी को बचाने की दरकार थी? दूसरे राज्य ने जांच की और उसमें जहरीले पदार्थ की मात्रा पाई गई तब जाकर कुछ कार्रवाई बनी क्या जरूरी है कि दूसरे राज्य जब एक्शन लें तब हम उसकी देखा देखी अपने यहां कदम बढ़ाए। इस तरीके की मौत के मामलों में कंपनी के मालिक पर इतनी सारी मौत का प्रकरण दर्ज करना नहीं बनता है ? मुआवजा देकर घटनाक्रम की इति श्री कर ली जाती है क्योंकि अधिकांश बच्चे गरीब परिवारों के थे और किसी राजनेताओं के घर से ताल्लुकुक्त नहीं रखते थे , यह वाकई शर्म की बात है। भोपाल के चौक चौराहों पर हेलमेट और सीट बेल्ट के लिए किस तरीके से लोगों को दौड़ कर पकड़ा जा रहा है और उनसे वसूली की जा रही है, जितने लोग पकड़े जाते हैं उसमें से कितनों के चालान बनते हैं और बाकियों को क्यों छोड़ा जाता है। यह आम जनता भी देखती है, यही कारण है की वर्दी का खौफ लोगों के अंदर से कम होता चला जा रहा है।