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22 Jan, 2026

परंपराएं क्या है

सरकारी विमान से कथावाचकों को लाने ले जाने की कोई परंपरा बनी हुई है क्या? परंतु आज धड़ल्ले से अनेक राज्यों में कथावाचकों को लाने के लिए शासकीय विमान का दुरुपयोग किया जा रहा है क्या यह परंपरा है ?

जिस तरीके से शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी के लिए उत्तर प्रदेश की पुलिस ने परंपराओं का हवाला देकर अभद्रताएं की हैं, नव बटुकों को चोटी से पकड़ कर खींचा है, उन पर प्रहार किए हैं यह हिंदू परंपराओं के अनुसार सही माना जाए या गलत यह पाठकों पर छोड़ता हूं। परंतु जहां तक परंपराओं का हवाला दिया गया और उनके दस्तावेजों की जांच करने की बात की गई कि वे शंकराचार्य हैं या नहीं तो इससे पूर्व 2025 के कुंभ में उन्हें शंकराचार्य के रूप में क्यों मान्यता दी गई थी तब उन से कोई दस्तावेज मांगे गए थे?

एक निजी विवाह कार्यक्रम में जहां शंकराचार्य मौजूद थे वहां प्रधानमंत्री जी ने उन्हें नमन करके उनसे आशीर्वाद लिया क्या उसे समय उनसे दस्तावेजों की जांच की बात की गई थी या उनके प्रोटोकॉल के लिए कोई व्यवस्था की गई थी ।जहां तक परंपराओं की बात है वहां उत्तर प्रदेश पुलिस ने जिन परंपराओं को तैयार किया है वह अपने आप में बहुत ही अनूठी हैं , सरकारी विमान से कथावाचकों को लाने ले जाने की कोई परंपरा बनी हुई है क्या? परंतु आज धड़ल्ले से अनेक राज्यों में कथावाचकों को लाने के लिए शासकीय विमान का दुरुपयोग किया जा रहा है क्या यह परंपरा है ? ज्ञान वान पुलिस अधिकारी बता दे पालकी किस श्रेणी का वाहन है, वहां वाहन के जाने की रोक थी.... सही बात है। पर पालकी पर कहा रोक का आदेश था? अभी पार्टी के आदेश पर कानून की व्याख्या करने वालों की शामत आएगी। कोर्ट में जवाब देना होगा। तब परंपरा बताना।कावड़िए सड़क पर चलते समय धर्म का पालन करने के बजाय लोगों से मारपीट करते हैं ,अभद्रता करते हैं परिवारों के साथ बच्चों के साथ चलती हुई गाड़ियों पर हमले करते हैं क्या यह परंपराएं हैं? उनकी सेवा के लिए थाने के अंदर वर्दी में महिला पुलिस पूरियां बनाती हैं, पुलिस के अधिकारी उनके पैरों में तेल लगाते हैं, उनके कंधों की मसाज करते हैं यह परंपरा कब से बनी की वर्दी में रहकर पूरियां तली जाए? क्या ये पुलिस की ड्यूटी में शामिल है।स्नान के दौरान हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की परंपरा कब की है। पुलिस अधिकारी के डांस के वीडियो देख कर सस्पेंड कर दिया गया, वर्दी में गदा ले कर चलने पर ईनाम दिया जाता है..... ये परंपरा कब बनी ?बहरहाल शंकराचार्य के साथ ग़लत किया गया इस को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखना चाहिए, पदवी पर ना भी जाए तो यदि जानकार लोग जानते है कि महामंडलेश्वर पद के लिए 80,000 नागा साधुओं का समर्थन लगता है तो पुलिस को किसी भी पार्टी का मोहरा बनने के बजाय अपने विवेक का इस्तेमाल करना चाहिए।