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02 Apr, 2024

गर्दे-सफ़र

अपने बुत अपनी ही झोली में छुपाकर लौट जा लोग अन्धे हैं यहाँ तेरा हुनर देखेगा कौन

उस पे पत्थर खाके क्या बीती ज़फ़र देखेगा कौन
फल तो सब ले जाएँगे ज़ख़्मे-शजर देखेगा कौन
आग तेरी है न मेरी, आग को मत दे हवा
राख मेरा घर हुआ तो तेरा घर देखेगा कौन
अपने बुत अपनी ही झोली में छुपाकर लौट जा
लोग अन्धे हैं यहाँ तेरा हुनर देखेगा कौन
अपनी-अपनी नहर के अतराफ़ बैठे हैं सभी
प्यास की सूली पे हम प्यासों के सर देखेगा कौन
घर में पहुँचूँगा तो सब गठरी टटोलेंगे मेरी
आँख में चुभती हुई गर्दे-सफ़र देखेगा कौन
                                ज़फ़र गोरखपुरी