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पर्यावरण
It is a matter of great happiness that the birth of an egg and the baby was born in the nests created by the vultures in the center.

भोपाल के गिद्ध संरक्षण एवं प्रजनन केन्द्र में हुआ नन्हें गिद्ध का जन्म

भोपाल के गिद्ध संरक्षण एवं प्रजनन केन्द्र केरवा को बड़ी सफलता हासिल हुई है। केन्द्र में सफेद पीठ वाले गिद्ध के चूजे का जन्म हुआ है। विलुप्ति की कगार पर पहुँच चुके गिद्ध संरक्षण की दिशा में किये जा रहे प्रयासों में यह बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। बच्चा 15 दिन का हो चुका है और एक अन्य अण्डा लम्बी चोंच वाले गिद्ध के जोड़े द्वारा सेहा जा रहा है। इस बच्चे का जन्म अगले 15 दिन में होने की संभावना है। वन मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य-प्राणी) श्री जितेन्द्र अग्रवाल ने केन्द्र के प्रयासों की सराहना करते हुए बधाई दी है।

अप्रैल-2014 में गिद्धों को हरियाणा के पिंजोर से और प्रदेश के तामिया से केरवा स्थित केन्द्र में लाया गया था। वर्ष 2016-17 में सफेद पीठ वाला गिद्ध एवं लम्बी चोंच वाले गिद्ध का एक-एक जोड़ा बना है। खुशी की बात है कि अण्डे का सेहना और बच्चे का जन्म केन्द्र में गिद्धों द्वारा बनाये गये घोंसलों में ही हुआ है। केन्द्र के वैज्ञानिक और कर्मचारी बच्चे की सतत निगरानी कर रहे हैं। जब तक बच्चा उड़ने लायक नहीं हो जाता, हरसंभव सावधानी बरती जा रही है। गिद्ध के बच्चे 4 माह बाद घोंसला छोड़ कर आत्म-निर्भर हो जाते हैं।

गिद्ध लम्बी आयु वाले परंतु धीमी गति से प्रजनन करने वाला पक्षी है। यह वर्ष में केवल एक ही अण्डा देता है। प्रकृति में इनकी प्रजनन सफलता मात्र 30 से 40 प्रतिशत है।