Vaagmi
Advertisement
पर्यटन
baitul ka amba

अनसुलझी पहेली बनी बैतूल की पहाड़ियों के ये शैल चित्र


बैतूल। सतयुग में नल देश के राजा नल की प्रेमिका विदर्भ की राजकुमारी दमयंती के संग प्रेम का प्रतीक बना विदर्भ का अंग रहा वर्तमान बैतूल जिला द्धापर युग में पाण्डवों के द्वारा काटे गए एक साल के अज्ञातवास का प्रमाण लिए आज भी सालबर्डी के पास स्थित पाण्डव मण्डप और पाण्डव गुफाओं की लम्बी चौड़ी श्रंखला के साथ महाराष्ट्र एवं मध्यप्रदेश की सीमा को चिन्हित करता है। सालबर्डी से लेकर बरिहम (बैहरम अचलपुर - परतवाड़ा के पास) तक फैली गुफाओं अनेक प्रकार के रहस्यो एवं चमत्कारो का खजाना भरा रखा है। मध्यप्रदेश के गठन के पूर्व बैतूल सी पी एण्ड बरार स्टेट का हिस्सा था। मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र की सीमा को चिन्हित करती सतपुड़ा की हरी-भरी हसीन वादियों एवं महाराष्ट्र के मेलघाट क्षेत्र से लगा सतपुड़ा-मेलघाट टाइगर का संरक्षित कारिडोर में शामिल धारूल की अम्बा मांई की पहाड़ियों में मौजूद गुफाओं के रहस्यों की खोजबीन जारी है। आदिमानव द्वारा निर्मित शैल एवं भित्तीय चित्र धारूल की इस पहाड़ी श्रंखला में अनेक रहस्यों के बारे में कहा जाता है कि अम्बादेवी क्षेत्र में अजंता,एलोरा,भीमबेठिका की की तरह पाषण कालीन आदिमानव शैलचित्र एवं भित्तीय चित्र तथा अजीबों- गरीब आकृतियां देखने को मिलती है। इस पूरी पहाड़ी में इन पंक्तियो के लिखे जाने तक 100 से अधिक प्राचिन गुफाओं की खोज वर्ष 2007 से 2012 में की गई। अब तक खोज में पाया गया कि 35 गुफाओं में पेड़ पौधो के रंगो से अनेक प्रकार की आकृति बनाई गई है। महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के इतिहासकारो ने समय-समय पर विभिन्न प्रवासों के दौरान यहां पर खोज यात्रा में भाग लेकर रहस्यों पर से पर्दा उठाने का प्रयास किया लेकिन रहस्य अनसुलझी पहेली बना हुआ है। कन्हैया महाराज ने देखा गुफा के अंदर बगीचा सबसे पहले 1970 के दशक में धारूल अम्बा मांई की गुफा में दर्शन करने गए अम्बा मांई के एक भक्त कन्हैया महाराज ने दावा किया था कि अम्बा मांई की गुफा के अंदर से एक रास्ता जाता है जहां से निकलने के बाद एक खुले स्थान पर काफी लम्बा चौड़ा बगीचा देखने को मिलता है, लेकिन रास्ता काफी भूल-भूलैया जैसा है। अम्बा माई की खोज कर्ता मंगला देवी के गुरु सूरदास महाराज को भी कन्हैया महाराज ने अम्बा दरबार लाया था और तब उन्होने मन्दिर प्रख्यात होने की भविष्यवाणी की थी। कन्हैया महाराज की वर्तमान में 92 वर्ष की उम्र हैं और आंखो का भी आपरेशन हुआ हैं उसे ना ठीक ढंग से दिखाई देता और ना चलना होता लेकिन रविन्द्र जैसै सच्चे भक्त के साथ माँ अम्बादेवी की यात्रा करने को आज तैयार रहते है। नागपुर के पुरात्व विभाग ने डाला है डेरा एक प्रकार से देखा जाए तो मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र की सीमा पर बसे अम्बा मांई देवी संस्थान पर महाराष्ट्र की उप राजधानी नागपुर का पुरातत्व विभाग का एक दल डेरा डाले दिखाई देता है। गुफाओं पर बकायदा लघु फिल्में एवं मराठी में पुस्तके लिखी जा चुकी है। सचित्र मराठी भाषा में छपी अनेक पुस्तको में जिक्र पढ़ने को मिलता है कि अम्बा मांई की गुफाओं में आदिमानव के भित्तिय शैलचित्र पाए गए है। यहां मौजूद 35 गुफाओं में अत्यधिक मात्रा में आदिमानव के द्वारा निर्मित आकृतिया पाई गई । पुरातत्व विभाग नागपुर द्वारा भी इन गुफाओं का निरीक्षण किया जिसके बाद यहां की वीडियो और फोटो केरल और भोपाल पुरातत्व विभाग को भेजी गई है।