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चौबेजी की बात
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भोपाल हादसा एक सबक सबके लिए

भोपाल में गणेश विसर्जन के दौरान दिल दहला देने वाला एक हादसा हुआ जिसमें भोपाल के 11 युवाओं ने अपनी जान गवाई , यह दिल दहला देने वाला मामला भोपाल की छोटे तलाब पर हुआ । घटनास्थल पर तत्काल वरिष्ठ अधिकारी और मंत्री तथा स्थानीय विधायक पहुंचे 11 युवाओं के बेजान जिस्म को देकर किसी को भी इतनी तकलीफ महसूस होगी जैसे उसे किसी परिजन को देखकर होती है । डूबे हुए बच्चों के शरीर निकालने के लिए जितनी तत्परता से एन डी आर एफ और अन्य पुलिसकर्मी लगे यदि यह विसर्जन के पूर्व लग जाते तो शायद यह हादसा नहीं होता।

दो छोटी नाव को जोडकर एक प्लेटफार्म बनाकर इतनी बड़ी मूर्ति को विसर्जन के लिए ले जाना कहीं से भी समझदारी और नियम अनुकूल नहीं माना जा सकता, यहां प्रशासन की लापरवाही सीधे तौर पर दिखाई देती है दो बोट पर 18 लोग दो बोट चालक और इतनी बड़ी मूर्ति कुल वजन उस बोट पर रखने काबिल नहीं था । उस बोट पर जाने वाले युवा भी लाइफ जैकिट नहीं पहने हुए थे यहां आपदा उसी कारण से हुई है। कुल मिलाकर नियमों की अवहेलना होने के कारण यह दुर्घटना हुई जिम्मेदार अधिकारियों को किसी भी तरीके से नहीं छोडना चाहिए उन पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। जिम्मेदारी से सरकार भी नहीं बच सकती ऐसी कार्रवाई के समय कोई नियम क्यों नहीं बनाए गए।
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 11 लाख रुपये प्रति व्यक्ति का मुआवजा तय किया है। क्या इससे उस परिवार की तकलीफ कम हो सकती है जिसने अपने परिवार के युवा को खोया है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने भी आज शोक व्यक्त किया । यह मात्र एक राजनैतिक स्टंट के रूप में दिखाई दिया यदि शिवराज सिंह चौहान इतने ही दुख में थे तो सन 2016 में इसी छोटे तलाब में पांच युवाओं की मौत की जांच का नतीजा आज तक क्यों नहीं मिला। उस समय भी उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए तत्काल जांच की घोषणा की थी ।
जांच होती रहेगी परंतु कोई नियमावली आज तक क्यों नहीं बनाई गई . भारत में पानी पर तैरने वाले उपकरणों के लिए इनलेंड वैसल एक्ट 1917 बनाया है और राज्यों को निर्देशित किया है कि मैं अपने यहां वॉटर पर होने वाली गतिविधियों के लिए नियम बनाएं। केरल और कर्नाटक सरकारों ने इसे नियम के रूप में तैयार किया है मध्यप्रदेश में वॉटर स्पोर्ट्स को लगातार बढ़ाया जा रहा है परंतु उन की सुरक्षा के लिए कोई नियम नहीं बनाए गए हैं। बोट कौन सी सुरक्षित होती है और वहां कौन उनको सुरक्षित करने के नियम देखेगा यह कहीं निर्धारित नहीं है बोट में बैठने वालों की संख्या कितनी है और बोट की क्षमता कितनी है यह निर्धारण करने वाला कोई नहीं है । बोट में बैठने वालों ने लाइफ जैकेट पहनी है अथवा नहीं यह दखने वाला भी कोई नहीं है।

इस हादसे के पीछे भी सबसे बड़ी वजह यही है कि इसमें नियमों को देखने वाला कोई नहीं था जिन्हें आरोपी बनाया गया है उन पर भी सिर्फ लापरवाही का ही आरोप लगाया जा सकता है क्योंकि जब कोई नियम ही नहीं है तो उन पर किस नियम के तहत धाराएं लगाई जाएगी। सरकार को अब इस मामले को गंभीरता से लेते हुए नियम तैयार करने होंगे।

अभी दुर्गा उत्सव भी सामने आने वाला है इन चीज़ों को ध्यान में रखकर भी सारी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करना होगा। मूर्तियों के साथ जाने वाली की तादाद नियंत्रित हो ,उनके आई कार्ड उनके पास पूर्व में दिए जाएं, भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल सही संख्या में मौजूद हो, विसर्जन स्थल के आसपास तैरती हुई नावों मैं गोताखोर तैयार रहें , निगरानी सतत चलती रहे। यह व्यवस्थाएं प्रशासन को ही करनी होंगी । आज हुई दुर्घटना को हम अंतिम दुर्घटना माने और भविष्य में इस तरीके की हुई दुर्घटना ना हो इसके लिए तैयार रहें। यही हम सब की ओर से इनको के लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
पुनीत