Vaagmi
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चौबेजी की बात
kuch to karo sarkar

कुछ तो करो सरकार

 आज महंगाई भारत के लिए एक बहुत बड़ी समस्या बन गई है आम आदमी का जीना दूभर हो चुका है डीजल पेट्रोल मैं लगातार दाम बढ़ने के कारण सभी आवश्यक चीजों के दाम लगातार बढ़ते चले जा रहे हैं चाहे वह सब्जियां हो दालें हो मसाले हो गैस के दाम बढ़ाई जा चुके हैं यह दौर एक आम आदमी के लिए बहुत ही कठोर दौर माना जा सकता है सीमेंट और रेत स्टील के दाम बढ़ने के कारण निर्माण की लागत बढ़ गई है केंद्र सरकार की प्रवक्ता समय-समय पर कुछ ना कुछ ऐसी बातें अपने बयान में करते हैं जिससे आम आदमी अपने गुस्से से लाल हो जाता है परंतु कुछ करने की स्थिति में नहीं है पहले अपना घर देखें या सरकार से जुड़े सरकार ने आपदा में अवसर का जो नारा दिया वह लोगों को बहुत भाया इसके चलते चाहे इमरजेंसी में लगने वाले इंजेक्शन हो दवाऐं हो ऑक्सीजन की जरूरत हो लोगों ने भरपूर लाभ उठाया यही कारण है कि आम आदमी पैसों से भी पिट गया और अपने लोगों को भी खो दिया यही पीड़ा  उसके अंतर्मन को झंझोड रही है खाने के तेल के दाम बढ़ जाने पर केंद्रीय मंत्री का यह कहना कि पहले आपको अशुद्ध तेल मिलता था अब शुद्ध होने के कारण लागत बढ़ी है वही पूर्व में प्याज के दाम बढ़ने पर एक मंत्री का सदन में यह कहना कि मैं तो प्याज नहीं खाती इसलिए मुझे फर्क नहीं पड़ता l अभी एक मंत्री जी कह रहे हैं यदि पेट्रोल के दाम बड़े हुए लग रहे हैं तो साइकिल क्यों नहीं चलाते इससे सेहत भी अच्छी रहती है और घर के पैसे भी बचते हैं इस इस तरह की बचकानी बातों से कहीं भी केंद्र सरकार की आम आदमी के प्रति मानवता नहीं दिखाई देती कोरोना काल में लोगों ने अपनी आमदनी के जरिए खत्म किए हैं किसी की दुकानें बंद हो गई किसी का रोजगार चला गया किसी के व्यवसाय ठप हो गए परंतु लगता है की इस समस्या से निकालने के लिए सरकार के पास कोई ठोस उपाय नहीं समझ में आ रहे हैं कोरोना काल में आम आदमी को जो सुविधाएं राशन के उपलब्ध कराई गई हैं उसको सरकार अपनी बहुत बड़ी उपलब्धि मान रही है और पीठ थपथपा रही है परंतु अब जब आम आदमी अपनी रोजगार की तलाश में लगा है लगातार काम करना चाहता है और अपने परिवार को पालना चाहता है इस समय पर वह अपने आप को सुव्यवस्थित कर अपने काम पर ध्यान देना चाहता है परंतु अभी समय है और लोगों को वापस अपने पुराने समय पर आने में समय लगेगा परंतु इस समय सरकार को मानवता पूर्ण रवैया अपनाकर बहाने ना करते हुए आम लोगों के लिए सुविधाएं मुहैया कराना चाहिए और रोजगार के साधन खुलना चाहिए

                                                                                                                                                                            पुनीत चतुर्वेदी