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machan per raha aadmi

मचान में बनाया बसेरा

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के जहाजपुर तहसील के शेरपुरा गांव में २४ वर्षीय प्रवासी मजदूर को १४ दिन पृथक-वास की अनिवार्य अवधि गांव के बाहर खेत के एक पेड़ पर 'मचान' के उपर अस्थाई रूप से बनाये गये बसेरे में रहकर काटनी पड़ी।

कोरोना वायरस संकट के चलते पिछले माह १६ अप्रैल को लॉकडाउन समय में हुई वृद्धि के बाद कमलेश अजमेर जिले के किशनगढ़ से २०० किलोमीटर दूर भीलवाड़ा जिले के अपने गांव पैदल चल कर पहुंचा था।

जहाजपुर तहसील के शेरपुर गांव पहुंचने पर कमलेश मीणा को स्थानीय निवासियों ने कोरोना वायरस संक्रमण के फैलने के भय से गांव में प्रवेश करने पर रोक दिया और जांच के आधार पर भीलवाड़ा के पृथक-वास में रहने का विकल्प दिया गया था। उसे एंकातवास में अस्थाई रूप से पेड़ पर बनाये गये 'मचान' पर बसेरा करना पड़ा।

  गांव वालों ने उसके परिजनों के साथ मिलकर बांस का एक 'मचान' तैयार किया और पृथक-वास के दौरान मचान पर ही उसके खाने, पीने और अन्य आवश्यक सामान के लिये उसके पिता सागरमल ने प्रबंध किया।

शेरपुरा गांव के कोविड-१९ नियंत्रण के प्रभारी और पंचायत प्राथमिक शिक्षा अधिकारी श्योजीराम मीणा ने बताया कि कमलेश ने १४ दिन का पृथकवास पूरा कर लिया है। मेडिकल दल प्रतिदिन उसकी जांच कर रहा है। उसमें किसी प्रकार का संक्रमण नहीं हुआ और वह अपने परिजनों के साथ रह रहा है।

राज्यभर में २२ मार्च से लॉकडाउन जारी है और अब लॉकडाउन के तीसरे चरण में जिलों को रेड, ओरेंज, और ग्रीन जोन आधारित बंटवारे के अनुसार रियायतें दी जा रही है। संक्रमित मरीजों का पता लगाने के लिये राज्यभर में सर्वे और स्क्रीनिंग का कार्य युद्धस्तर पर जारी है।