Vaagmi
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साहित्य
tamam umra ki un ki

अब्बा मियाँ के नाम

  शफ़ीक़ बाप को रूदाद लिख रही हूँ

सबक़ हैं उनके सभी याद लिख रही हूँ मै  

वो ख़ानदान का इज़्ज़ो जलाल जाहो हशम

है याद अज़मते अजदाद, लिख रही हूँ मै

  ये राहतें हैं उन्हीं की दुआओं का समरा

है ज़िन्दगी मेरी आबाद, लिख रही हूँ मै  

तमाम उम्र की उनकी नसीहतों के तुफ़ैल

है कामयाब ये औलाद, लिख रही हूँ मै  

जो उनसे अज़्म की दौलत मिली मुझे नुसरत

तो हौसलों में हूँ फ़ौलाद, लिख रही हूँ मै                                  

                                        डॉ नुसरत मेहदी